परसपुर पुलिस गंभीर धाराओं के आरोपियों पर मेहरबान

अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद भी नहीं हो रही गिरफ्तारी| एसपी और डीआईजी आफिस के चक्कर काटते काटते घिस जाती है पीड़ितों की चप्पल और फिर टूट जाती है न्याय की आस। परसपुर, गोण्डा। जिले के खुद को काफी तेजतर्रार कहलाने वाले एसपी आकाश तोमर भले ही फरियादियों को थाने चौकी पर न्याय दिलाने के दावे करते हुए आये दिन कागजी निर्देश देकर सुर्खियों में बने रहते हैं लेकिन जमीनी हकीकत देखने और औचक निरीक्षण करना जरूरी ना समझने से थाने चौकी पर न्याय व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। ऐसे में आखिर कानून व्यवस्था पर सवाल क्यों ना उठे जब एसपी और डीआईजी कार्यालय के चक्कर काटते काटते पीड़ितों की चप्पल घिस जाती है और न्याय की आस टूट जाती है।
मिली जानकारी के मुताबिक ताजा मामला परसपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हृदय बैसन पुरवा का है। जहां महीनों पहले पीड़ित रामानंद रास्ते पर पटाई कर रहे थे, तभी विपक्ष के कुछ लोग वहां आ गए और रामानंद व उनके परिवार वालों पर हमला कर दिया। जिसमे रामानंद को गहरी चोट आई। जब घायल पीड़ित परसपुर थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की और उल्टे घायलों को ही हिरासत में ले लिया। वहीं मारपीट में गंभीर रूप से घायल रामानंद को बिना रिपोर्ट दर्ज किए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया जहां डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। घायल की स्थिति अधिक गंभीर होने पर जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने भी मरीज को लखनऊ के लिए रेफर कर दिया जहां इलाज के दौरान रामानंद की मौत हो गई। जिसके बाद मृतक के भाई हरीराम ने हमला करने वाले व्यक्तियों को सजा दिलाने के लिए थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक तक तक गुहार लगानी शुरू की लेकिन पुलिस ने इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया अंततः पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली तब जाकर आरोपियों के खिलाफ धारा 147, 149, 323, 504, 120 बी व 304 के तहत मुकदमा दर्ज़ किया गया। फिलहाल मुकदमा तो दर्ज़ हो गया और एक महीने का समय भी बीत गया लेकिन अभी तक थाना परसपुर की पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है और पुलिस आज तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर पाई।
मृतक के भाई हरीराम ने बताया कि उसने तीन बार डीआईजी के यहां व तीन बार पुलिस अधीक्षक के यहां प्रार्थना पत्र दिया लेकिन फिर भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में अब गंभीर सवाल ये उठता है कि प्रदेश की योगी सरकार कानून व्यवस्था के चाक चौबंद होने का दावा करते हुए अपनी पीठ थपथपाती है फिर ऐसे मामले आखिर क्यों सामने आते हैं और जिम्मेदार पुलिस सुधर क्यों नहीं रही है। इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।