मंगलवार की शाम को चुनाव प्रचार कार्य बंद होने के बाद सभी प्रत्याशी जोड़-तोड़ में जुटे

नगर निकाय चुनाव अब अंतिम चरण में है। मतदान के लिए अब सिर्फ कुछ घंटे ही बाकी बचे हैं। मंगलवार की शाम को चुनाव प्रचार कार्य बंद होने के बाद सभी प्रत्याशी जोड़-तोड़ में लग गए हैं। इसी क्रम में तहसील क्षेत्र कर्नलगंज के अन्तर्गत नगर पालिका परिषद कर्नलगंज,नगर पंचायत कटराबाजार व नगर पंचायत परसपुर में गत रात्रि में कई प्रत्याशियों के यहां बैठकों का दौर चलता रहा। भाजपा, सपा, आम आदमी पार्टी सहित निर्दलीय प्रत्याशी और पार्टी पदाधिकारी तथा सियासत के जानकार चुनावी समीकरण बैठाने में लगे रहे। चुनाव के दंगल में विजय श्री हासिल करने के लिए प्रत्याशी बुजुर्गों को अपने पक्ष में करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन चुनाव में मतदाता किस मूड में है इस बार साफ नहीं हो रहा है। क्योंकि मतदाता भी इस बार खुलकर सामने नहीं आ पा रहा है। जिसे देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि इस बार मतदाता की खामोशी कुछ न कुछ गुल जरूर खिलाएगी। प्रत्याशियों की नजर घर के मुखिया पर लगी है। इसी के चलते प्रत्याशी बुजुर्गों के पैर छूकर वोट के रूप में उनका आशीर्वाद लेने में लगे हुए हैं। चेयरमैन की कुर्सी को प्राप्त करने के लिए काफी संख्या में प्रत्याशी मैदान में हैं। जिनमें बहुचर्चित नगर पालिका परिषद कर्नलगंज क्षेत्र जहां मिली जानकारी के मुताबिक 30532 मतदाता हैं जो अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यहां मुख्य रूप से प्रत्याशी भाजपा से श्रीमती रामलली पत्नी रामजीलाल मोदनवाल चुनाव चिन्ह कमल, सपा से श्रीमती रजिया खातून पत्नी शमीम अहमद अच्छन चुनाव चिन्ह साईकिल,आम आदमी पार्टी से श्रीमती मंशा देवी पत्नी शिवकुमार कांदू चुनाव चिन्ह झाड़ू, निर्दलीय प्रत्याशी श्रीमती बदरून्निशां पत्नी मोहम्मद अहमद प्रधान कर्नलगंज चुनाव चिन्ह जीप से मजबूत दावेदारी कर रही हैं। आपको बता दें कि मतदान में अब कुछ घंटे ही बाकी बचे हैं। जहां प्रत्याशी एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर मतदाताओं से बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं। वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए तरह-तरह के डोरे डाल रहे हैं। सभी प्रत्याशी चाह रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा वोटरों को अपने पक्ष में किया जाए। परन्तु होशियार मतदाता इस बार शांत वोट के रूप में कार्य कर रहे हैं और अपने दरवाजे पर आने वाले सभी प्रत्याशियों को और उनके पैरोकारों को संतुष्ट करने में जुटे हैं। वैसे इस चुनाव में साइलेंट वोटर की अहम भूमिका मानी जा रही है। साइलेंट वोटर या यूं कहें कि पर्दे के पीछे रहने वाला वह मतदाता जो राजनीतिक वाद विवाद में नहीं उलझता। लेकिन चुनाव की बाजी पलटने में उसका बहुत बड़ा हाथ होता है। आमतौर पर महिला और बुजुर्गों को श्रेणी में रखा जाता है। इनका एक पक्का मत होता है। लेकिन अक्सर यह राजनीतिक गणित बैठाते हुए निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। फिलहाल मतदाताओं का निर्णय तो चार मई को होने वाले मतदान पर निर्भर करेगा।